Friday, 15 March 2019

कुछ नई शुरुआत कर

'कुछ नई शुरुआत कर'
संग संग मिल
साथ साथ चल
शुरुआत कर
ठहराव जो है,
उसमें जज़्बात भर
और कुछ बात कर
सदियों से चली
परंपरा को, अहिवात कर
एक नहीं, सौ नई बात कर
कर तुम अपनी बात कर
कर बात इस कदर
कुछ तो नई, शुरुआत कर
मान को सम्मान कर
गर हो कोई, सारथी
उस पर तुम अभिमान कर
संग संग मिल
साथ साथ चल
कुछ तो नई
शुरुआत कर ...

    ✍️ सुभाष कुमार

Tuesday, 5 March 2019

'क्या लिखूँ समझदारी'



क्या लिखूँ समझदारी

क्या करूँ जिम्मेवारी, जवाबदेही
होती जा रही है।
क्या लिखूँ जानकारी, तबाही
होती जा रही है।
क्या पढ़ूँ समझदारी, बेकारी
होती जा रही है।
क्या बनाऊँ स्वाद, बेस्वाद
होते जा रहा है।
क्या दिखाऊं कलाकारी, नदारद
होती जा रही है।
 
    ✍️सुभाष कुमार

पिंकी:- मैं और मेरा गुल्लक

  आज महिला दिवस है आप सभी महिलाओं को इस दिवस की शुभकामनाएं को साथ मेरा नाटक इसी विषय पर आधारित है देखिये इस दृश्य को शब्द के माध्यम से.... ...