Tuesday, 19 August 2025

बिखर गई जज्बातें

 

बिखर गई जज्बातें

दिल की कलम से 
इश्क़ इज़हार कर दो

सारी गुलाबी कलम से
हर एक तार से प्यार लिख दो

लिख दो कलम की बातें
जो गुलाब कह नहीं पाए

वो उम्मीद की बातें
जो गुलाब सह नहीं पाए

और बिखर गई जज्बातें
गुलाब की पंखुड़ियों की तरह 

खिलता गुलाब और प्यार
दोनों एक तरह की होती है

कलम को शब्द मिल गई
और गुलाब को भावना

एक निखर गया
एक बिखर गया

वैसे ही जैसे प्रेम में
चाँद और चकोर...!

  ✍️ सुभाष कुमार

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