Wednesday, 22 September 2021

"बेटी बियोग"


        भोजपुरी के शेक्सपियर "भिखारी ठाकुर"
      भोजपुरी के शेक्सपियर "भिखारी ठाकुर"
      नाटक 
    "बेटी बियोग"
सामाजिक असमानता और आर्थिक विषमता के प्रतिरोध में स्त्री विमर्श को समेटती यह कृति आज के दौर संदेश प्रद है।

इसमें लोकनाट्य परंपरा की सुगंध तो है ही साथ ही आंचलिक सामाजिक बदलाओ के तत्व को स्वीकार करने की ताकत है। 
बतौर कथानक लोभी पिता थोड़े से अर्थ के लिए बेटी का हाथ एक अधेड़ उम्र के हाथ बेच देता है।
 अंतोगत्वा "भिखारी ठाकुर" नाइक उत्पातो के माध्यम से प्रतिकार करने में समर्थ होते हैं।

स्थान:- ललित नारायण मिथिला विश्विद्याल परिसर ,दरभंगा।

नुक्कड़ नाटक के पात्र:-
चटक..सुभाष कुमार
लोभा.. अंकिता कुमारी
उपातो.. यूरेका 
झंटूल.. राजकपूर 
पण्डित.. हीरा लाल रॉय
ग्रामीण गोतिया.. मो0 शहंशाह
पंच.. अंज़रूल हक़

दुल्हा का पिता- ज़फ़र आलम
सूत्रधार /संगीत.. मानोज कुमार सिंह
विदूषक.. रोहित 
अन्य ग्रामीण.. दयाल, रौशन, समीर, सचिन,रोहित,अवनिष, मुकेश, रवि, 
समाजी- सचिन कुमार, समीर कुमार, रविभूषण शर्मा , जय भारती, राजू रंजन, सुदीप कुमार, मुकेश कुमार राहुल,
वेष-भूषा- सारिका भारती, सचिन कुमार, जय भारती
सखी.... वसुधा, अंकिता, सारिका .
आलेख- भिखारी ठाकुर
सह निर्देशन.. सचिन कुमार 
निर्देशन.. दीपक कुमार सिन्हा
विशेष आभार विभागाध्यक्ष- डॉ लावण्या कृति सिंह काव्या
आभार- सुनील ठाकुर, हेमेंद्र लाभ, सुधीर कुमार, विजय साह, श्याम भाष्कर, महेंद्र नारायण चौधरी, अरुण झा।
सहयोग:- सागर सिंह

Wednesday, 16 June 2021

अपनों से तो बात हो जाती है


गैरों से बात करनी पड़ती है, 
अपनों से तो बात हो जाती है।

   ✍️सुभाष कुमार

Wednesday, 5 May 2021

जब कभी आपको




जब कभी आपको 
आँसू मीठा लगने लगे,
 तो समझ लेना
 जीवन की सार्थकता में 
अवरोध उत्पन्न हो गया है।
                                                                              
                           ✍️  सुभाष  

Monday, 12 April 2021

आधी रात

 


 आधी रात और आधी बात
  दोनों एक जैसी होती है...!

    ✍️ सुभाष कुमार

पिंकी:- मैं और मेरा गुल्लक

  आज महिला दिवस है आप सभी महिलाओं को इस दिवस की शुभकामनाएं को साथ मेरा नाटक इसी विषय पर आधारित है देखिये इस दृश्य को शब्द के माध्यम से.... ...