Saturday, 25 May 2019

इश्क़ इत्तिफ़ाक़ नहीं

इश्क़ इत्तेफाक़ नहीं


इश्क़ इत्तेफाक़ नहीं
इश्क़ इत्तेफाक़ नहीं
मंजूरी है, क़िस्मत की
इश्क़ इम्तहाँ नहीं
मंजूरी है, सब्र की
इश्क़ रोग नहीं
मंजूरी है, महबूबा की
इश्क़ बन्धन नहीं
मंजूरी है, समर्पण की
✍️सुभाष कुमार


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Sunday, 19 May 2019

एक-दूसरे की यार हो तुम

धुनकी साबर है कुछ कर दूँ
देश की  तस्वीर बदल दूँ।
नफ़रत की सारी दीवार गिरा दूँ
महफ़िल को भी ये बतला दूँ।
घोटाले करने की सारी हदें बतला दूँ
एक-दूसरे की यार हो तुम तुझे बता दूँ।
प्रतिनिधि को उसमें उसीको दिखला दूँ
ज़हर जो  फैलाया है उसे ही पिला दूँ।
        ✍️ सुभाष कुमार

पिंकी:- मैं और मेरा गुल्लक

  आज महिला दिवस है आप सभी महिलाओं को इस दिवस की शुभकामनाएं को साथ मेरा नाटक इसी विषय पर आधारित है देखिये इस दृश्य को शब्द के माध्यम से.... ...