Saturday, 27 July 2019

पटना की शाम...❤️

                                                    पटना की शाम...❤️

बारिश की मदमस्त बूंदे
जैसे ये मौसम सुहाना हुआ
धीमी धीमी पवन चले
देख मन मदमस्त हुआ
झिलमिल झिलमिल रौशनी
ये देख मन उल्लसित हुआ
सावन की भीगी भीगी बूंदे
ये देख यौवन दीवाना हुआ

✍️ सुभाष कुमार

Tuesday, 23 July 2019

ख़्यालों की कश्ती में




ख़्यालों की कश्ती में 
मैं सवार हो कर ....
सपनों के लहरों में
अपनों की चाहत में 
गैरों की बस्ती में...
मंज़िल की आस मे
मस्ती उधार ले कर...
मैं चल पड़ा हूँ...

 ✍️सुभाष कुमार

Sunday, 14 July 2019

रश्में मोहब्बत भी क्या खूब है।

       




रश्में मोहब्बत भी क्या  खूब है।

तहज़ीब की बातें भी क्या खूब है।

मैं,तुम की बातें भी क्या खूब है।

दस्तूर दुनिया भी क्या खूब है।

रश्में समाज भी क्या खूब है।

इनके संस्कार  भी क्या खूब है।

मैं, तुम और वादें भी क्या खूब है।

हसरतें मुकाम भी क्या खूब है।

रश्में रिवाज़ भी क्या खूब है।

परवरिशें बंधन भी क्या खूब है।

✍️ सुभाष कुमार

पिंकी:- मैं और मेरा गुल्लक

  आज महिला दिवस है आप सभी महिलाओं को इस दिवस की शुभकामनाएं को साथ मेरा नाटक इसी विषय पर आधारित है देखिये इस दृश्य को शब्द के माध्यम से.... ...