अभी रात बाकी है
अभी बात बाकी है।
कल की याद बाकी है
पल की बात बाकी है।
सफर की साथ बाकी है
गुजरी रात की याद बाकी है।
गलियों की याद बाकी है
चौपाटी की शाम बाकी है।
ज़िन्दगी की राज बाकी है
उम्र ये तमाम बाकी है।
✍️ सुभाष कुमार
#ज़िन्दगी #कविता
आज महिला दिवस है आप सभी महिलाओं को इस दिवस की शुभकामनाएं को साथ मेरा नाटक इसी विषय पर आधारित है देखिये इस दृश्य को शब्द के माध्यम से.... ...