Friday, 15 June 2018

'तेरे इश्क़ में, मैं इराक हुआ'

तेरे इश्क़ में, मैं इराक हुआ















तेरे इश्क़ में, मैं इराक हुआ

बैसाख में जल कर, ख़ाक हुआ।

तुमने क्या जलवा दिखा गई
भूल गया मैं तेरी बेवफाई  ।

हमने तो बस थोड़ सा मोहब्बत किया
दिल खोल कर तुमने बारूद दिया।

तेरी बहसी दरिंदो ने ज़ूल्म बेजान किया
मेरा शरीर, दिल और आत्मसम्मान गया।

तेरे नियत में, जो तेरा ख़ाब हुआ
क्या वो सिर्फ मुझको ही बर्बाद किया।

तुम कुचल सकते हो, शरीर में जो रक्त है
हमारी भावना,स्पन्दन सख़्त और जिद्दी है।

ये जो तेरा इश्क़ है, बहुत दाग़दार है
चमकता चेहरा, खण्डहरों की बारात है।

निहायति कानून की महक बदबूदार हुआ
मेरा हंसता-खेलता ज़मीन दाग़दार हुआ।

तुम दिल को क्या दिमाग में रखते हो
हम दिलेनादान अपने पास में रखतें है।

तेरे इश्क में, मैं इराक हुआ
बैसाख में जल कर,  ख़ाक हुआ ।
   ✍️ सुभाष कुमार

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