Saturday, 26 January 2019

"अश्क को संभाले रखना"

         
महसूस करना चाहता हूँ
तेरे मेरे बीच का जो बंधन है
उस बंधन में जो स्पंदन है
उसको महसूस करना चाहता हूँ
इश्क क्या है, मैं नहीं जानता
फासला हुआ तो इश्क ने
मुझ से ही मुझको दूर कर दिया
अब मज़बूर हूँ, मैं वो नहीं जानती
कैसे भूलूँ उस पल को
जो बातें होती थी कल को
तुम  खुश  हो  आज  में
कसक नही  है  दिल  में
मन करे रोने का तो रो लो
रोने मत देना दिल को
अश्क को संभाले रखना
काम आएगा जीने को
    ✍️सुभाष कुमार

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