Sunday, 19 May 2019

एक-दूसरे की यार हो तुम

धुनकी साबर है कुछ कर दूँ
देश की  तस्वीर बदल दूँ।
नफ़रत की सारी दीवार गिरा दूँ
महफ़िल को भी ये बतला दूँ।
घोटाले करने की सारी हदें बतला दूँ
एक-दूसरे की यार हो तुम तुझे बता दूँ।
प्रतिनिधि को उसमें उसीको दिखला दूँ
ज़हर जो  फैलाया है उसे ही पिला दूँ।
        ✍️ सुभाष कुमार

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