Tuesday, 23 July 2019

ख़्यालों की कश्ती में




ख़्यालों की कश्ती में 
मैं सवार हो कर ....
सपनों के लहरों में
अपनों की चाहत में 
गैरों की बस्ती में...
मंज़िल की आस मे
मस्ती उधार ले कर...
मैं चल पड़ा हूँ...

 ✍️सुभाष कुमार

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