छायाचित्र - 📸 शिकारपुरी
तुम देखो अपने शहर को
तुम देखो अपने शहर को
मैं अपने पुआली महल से
एक गाँव बना कर जी लूंगा...
तुम देखो आपने मीनार को
मैं अपनी बांस की कोपला से
एक कुटी बना जी लूंगा...
तुम देखो अपनी सोसायटी को
मैं अपने संगी लंपट यारो से
एक साथी बना के जी लूंगा...
तुम खाओ पिज़ा बर्गर को
मैं अपने चना और मकई से
एक रोटी-पुआ बना कर जी लूंगा...
तुम पीओ कोल्ड ड्रिंक पेप्सी को
मैं अपने गाये-भैंसियो से
एक सेर दूध निकाल कर जी लूंगा...
तुम खेलो पोलो -पब जी को
मैं अपनी थपा - टीप्पो से
एक लकीर खिंच कर जी लूंगा...
तुम देखो अपने शहर को
मैं अपने पुरखो की यादों से
एक दिल में पूरी संसार बसा कर जी लूंगा...
तुम देखो अपने शहर को
मैं अपने पुआली महल से
एक गाँव बना कर जी लूंगा...
✍️ सुभाष कुमार

Very nice 👍
ReplyDeleteAwsm
ReplyDeleteVery simple and original...
ReplyDeleteसुन्दर।
ReplyDeleteखूबसूरत रचना👏👏👏
ReplyDeleteWell said actual living is in village.. .👍
ReplyDeleteBahut khubsurat❤
ReplyDeleteBahut sundar
ReplyDeleteBahut umdaaaa👌
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