लिट्टी इंटरनेशनल
लालू ने
लिट्टी को
इंटरनेशनल बना दिया !
आप्रवासी भारतीय जुटे थे
इंटरनेशनल हो गया था
समूचा पटना !
बड़ी गहमागहमी रही
दो-तीन रोज़ तो
लालू बोले :
हम चौबीस रोज
अमेरिका रहे
उहाँ हमें उधर का ही
खाना लेना पड़ा, मजबूरी थी
अपनी लिट्टी कहीं नहीं,
ब्रेड ही ब्रेड आगे आता था
जाम-जेली-सॉस... जी हाँ
बहू नहीं सामने आई कहीं !
विदेशी भारतीय विदा हुए तो
लालू ने एक-एक किलो सत्तू दिया
और... हाँ, और
लिट्टी बनाने का तरीका
खुद-ब-खुद सिखलाया-
"जी हाँ, इसमें क्या दिक्कत है
गैस की आँच में नहीं--
कंडे की आँच में सिकने पर
इसका अरिजिनल सबाद मिलेगा !
आप चाहेंगे तो आप उहाँ से
अपना कुक (रसोइया) भेजिए,
इहाँ महीने-भर रहेगा
सीख जाएगाऽऽ
मगर हाँ,
एक ठो दिक्कत फिर भी रह जाएगी
कच्चे आम की चटनी,
करोंदे का अचार
कच्चे आँवले की चटनीीीी....
ई सब कइसे होगा?
लेकिन हाँ, जाना-आना लगा रहेगा तो
आपके तरफ का खाना-पीना
हमारे इहाँ के लोग भी जान जाएँगे
और हाँ, गुझिया, मालपुआ
मिस्सी रोटी... ई सब सीखने में
आपके कुक् को कई महीने लग जाएँगे...
हड़बड़ाइए नहीं
रसे-रसे सब कुछ आपके कुक्
सीखिए लेगा नऽ!!"
✍️ नागार्जुन

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