बिखर गई जज्बातें
दिल की कलम से
इश्क़ इज़हार कर दो
सारी गुलाबी कलम से
हर एक तार से प्यार लिख दो
लिख दो कलम की बातें
जो गुलाब कह नहीं पाए
वो उम्मीद की बातें
जो गुलाब सह नहीं पाए
और बिखर गई जज्बातें
गुलाब की पंखुड़ियों की तरह
खिलता गुलाब और प्यार
दोनों एक तरह की होती है
कलम को शब्द मिल गई
और गुलाब को भावना
एक निखर गया
एक बिखर गया
वैसे ही जैसे प्रेम में
चाँद और चकोर...!
✍️ सुभाष कुमार
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