Friday, 8 June 2018

मैं काफिर हूँ

मैं किसको भूलूँ किसको याद करू।
मैं निक्कमा(कमीना) किस-किस को बर्बाद करू।
मैं किस-किस को ज़ख़्म दिया क्या याद करू।
मैं किसके दर्द का मरहम बनु।

मैं किसको घर-घर का दर्द कहूँ ।
मैं किसको साम्यवाद की बात कहूँ।
मैं किस-किस से फ़रयाद करू।
मैं किस-किस को ज्ञान की बात कहूँ ।

मैं किसको भूलूँ किसको याद करूँ।
मैं काफिर हूँ किस से ये बात कहूँ।
मैं ग़म लिए सीने में कितनों को आगाह करूँ।
मैं किस-किस को बर्बाद करूँ।
मैं, मैं को ही बेबाक करूँ।
मैं किस-किस को याद करूँ।

✍ सुभाष कुमार

5 comments:

पिंकी:- मैं और मेरा गुल्लक

  आज महिला दिवस है आप सभी महिलाओं को इस दिवस की शुभकामनाएं को साथ मेरा नाटक इसी विषय पर आधारित है देखिये इस दृश्य को शब्द के माध्यम से.... ...