मैं किसको भूलूँ किसको याद करू।
मैं निक्कमा(कमीना) किस-किस को बर्बाद करू।
मैं किस-किस को ज़ख़्म दिया क्या याद करू।
मैं किसके दर्द का मरहम बनु।
मैं किसको घर-घर का दर्द कहूँ ।
मैं किसको साम्यवाद की बात कहूँ।
मैं किस-किस से फ़रयाद करू।
मैं किस-किस को ज्ञान की बात कहूँ ।
मैं किसको भूलूँ किसको याद करूँ।
मैं काफिर हूँ किस से ये बात कहूँ।
मैं ग़म लिए सीने में कितनों को आगाह करूँ।
मैं किस-किस को बर्बाद करूँ।
मैं, मैं को ही बेबाक करूँ।
मैं किस-किस को याद करूँ।
✍ सुभाष कुमार
Nice very nice
ReplyDeleteThanks bandhu...☺️💐
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ReplyDeleteKhud ko yaad rakhe...ar dusre ko barbaad hone se bachaye..be positive
ReplyDeleteशुक्रिया
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