Tuesday, 2 October 2018

हमरी वोटबा पर बइठले हो

का जुलूम किये रे
जो बंदूक उठइले हो

हमारी खेतबा के खा के
जो इ जुलूम कइले हो

  हमरी वोटबा पर बइठले हो
  तानाशाही में सभे जुटले हो

  बोली के जाल फइलेले हो
  हमरे तू पिटबइले हो

हमनी ना जरइबो हड़बा
तोहनी का खाइबो अलुहा

बहुते भइलो जुलुमबा
चालतो ना इ ससनाबा।
✍️सुभाष

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