तुम जो आ जाते एक बार
इस जहां को देख जाते एक बार।
युग-युग की कथाएं, सुन जाते एक बार
जो तुम आ जाते एक बार।
मन चंचल है, उसको भा जाते एक बार
पथ-पथिकों , में समा जाते एक बार
इस नयन को, भा जाते एक बार।
इस फरिश्तों के जहां में...
अपना बनाते जो एक बार
नदियां, पहाड़, जंगल
पावन धरती को , भा जाते एक बार
जो तुम आ जाते एक बार।
✍ सुभाष कुमार
Monday, 24 December 2018
इस फरिश्तों के जहां में...
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
पिंकी:- मैं और मेरा गुल्लक
आज महिला दिवस है आप सभी महिलाओं को इस दिवस की शुभकामनाएं को साथ मेरा नाटक इसी विषय पर आधारित है देखिये इस दृश्य को शब्द के माध्यम से.... ...
-
हर इंसान के पास अपनी दृष्टि होती है। दुनिया को देखने का अपना नजरिया होता है। कलाकारों कि जो दृष्टि होती है, वह औरों से अलग होती है। यह अन...
-
तेरे इश्क़ में, मैं इराक हुआ तेरे इश्क़ में, मैं इराक हुआ बैसाख में जल कर, ख़ाक हुआ। तुमने क्या जलवा दिखा गई भूल गया...
-
मैं शहर गया वहां ज़हर लिया फिर उसको थोड़ा सा लिया उसका असर मेरे पर न हुआ, कसर उस शहर में था जो आसपास के शहर में हुआ ज़हर का चर्चा ...
बहुत अच्छा भैया, छू गया।
ReplyDeleteआभार प्रिय,
Delete#supbbb
ReplyDelete