Monday, 24 December 2018

इस फरिश्तों के जहां में...

तुम जो आ जाते  एक  बार
इस जहां को देख जाते एक बार।
युग-युग की कथाएं, सुन जाते एक बार
जो तुम आ जाते एक बार।
  मन चंचल है, उसको भा जाते एक बार
पथ-पथिकों ,  में समा जाते एक बार
इस नयन को, भा जाते एक बार।
इस फरिश्तों के जहां में...
अपना बनाते जो एक बार
नदियां, पहाड़,  जंगल
पावन धरती को , भा जाते एक बार
जो तुम आ जाते एक बार।
  
          ✍ सुभाष कुमार

3 comments:

पिंकी:- मैं और मेरा गुल्लक

  आज महिला दिवस है आप सभी महिलाओं को इस दिवस की शुभकामनाएं को साथ मेरा नाटक इसी विषय पर आधारित है देखिये इस दृश्य को शब्द के माध्यम से.... ...